जवानों को एलएसी पर असाधारण परिस्थितियों में हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत, राजनाथ ने कहा- घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दें
गलवान घाटी में चीन की सेना से हिंसक झड़प के बाद सरकार ने सेना का हौसला बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। सेना को 500 करोड़ तक के हथियार खरीदने के अधिकार दिए गए हैं। इसके अलावा सेना ने नियमों में बदलाव करते हुए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर असाधारण परिस्थितियों में जवानों को हथियारों के इस्तेमाल की भी इजाजत दे दी गई है।
न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नियमों में बदलाव के तहत फील्ड कमांडरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे विशेष परिस्थितियों में अपने जवानों को हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत दे सकते हैं।
दरअसल, गलवान में हुई झड़प के दौरान भारतीय जवानों ने इसलिए हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया था, क्योंकि 1996 और 2005 में हुए समझौते में ऐसा ना करने पर चीन और भारत में सहमति बनी थी। दोनों देशों में इस बात पर भी समझौता हुआ था कि उनकी सेनाएं एलएसी के 2 किलोमीटर के दायरे में विस्फोटकों और हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगी।
रक्षा मंत्री ने सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से बैठक की, कहा- सख्ती से निपटें
केंद्र ने अब आर्म्ड फोर्सेज को पूरी छूट दे दी है। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सेनाओं को धरती, आसमान और समुद्री इलाके में चीन की किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए सख्त रवैया अख्तियार करने के लिए कहा गया है।
रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत समेत सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे, एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह से बात की। इसी में उन्होंने सेनाओं को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए।
15 जून की रात को गलवान में हुई थी दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प
करीब 6 हफ्ते से भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है। 15 जून की रात चीन और भारत के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी। चीन के सैनिकों ने कंटीले तार वाले डंडों से भारतीय जवानों पर हमला किया था, जिसमें 20 जवान शहीद हो गए। भारत ने भी चीन के 40 से ज्यादा सैनिकों के मारे जाने की बात कही है, लेकिन चीन ने अब तक अपने मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है।
करीब 6 हफ्ते से भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है। 15 जून की रात चीन और भारत के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी। चीन के सैनिकों ने कंटीले तार वाले डंडों से भारतीय जवानों पर हमला किया था, जिसमें 20 जवान शहीद हो गए। भारत ने भी चीन के 40 से ज्यादा सैनिकों के मारे जाने की बात कही है, लेकिन चीन ने अब तक अपने मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है।
भारत ने कहा- गलवान घाटी पर चीन के दावे मंजूर नहीं
- भारत सरकार का कहना है कि गलवान घाटी पर चीन के दावे मंजूर नहीं हैं। ये चीन के खुद के पहले के रुख के उलट हैं। गलवान पर स्थिति लंबे समय से साफ है। एलएसी से पूरी तरह वाकिफ हैं और इसका पालन करते हैं। भारत ने कभी एलएसी पार नहीं की। भारतीय सैनिक इस क्षेत्र में लंबे समय से गश्त कर रहे हैं। सभी निर्माण भारत की हद के अंदर ही हैं। भारत के नक्शे में सीमा स्पष्ट है। 60 साल में 43 हजार वर्ग किमी क्षेत्र पर अतिक्रमण के बारे में देश जानता है। सरकार एलएसी में एकतरफा परिवर्तन की इजाजत नहीं देगी।
- उधर, चीन लगातार गलवान घाटी को अपनी सीमा में बता रहा है। उसका कहना है कि गलवान घाटी चीन का हिस्सा है और एलएससी से हमारी तरफ है। भारतीय सैनिक यहां पर जबरन रोड और ब्रिज बना रहे हैं।